अध्याय 7 — सप्तम अध्याय
मनुस्मृति
229 श्लोक • केवल अनुवाद
उस (किला) को हथियार (तलवार, धनुष आदि), धन (सुवर्ण, चाँदी आदि), धान्य (गेहूँ, चावल, चना आदि), वाहन (हाथी, घोड़ा, रथ, ऊंट: आदि), ब्राह्मणों, कारीगरों, यन्त्रों, चारा (घास, भूसा, खरी, कराई आदि) पशुओं के भोज्य पदार्थो) और जल से संयुक्त रखे।
राजा उस (किले) के बीच में (स्त्री-गृह, देव मन्दिर, अग्निशाला, स्नानागार आदि भवनों के अलग-अलग होने से) बड़ा, (खाई, परकोटा अर्थात् चहारदीवारी, सेना आदि से) सुरक्षित (सब ऋतुओं में फलने-फूलनेवाले वृक्ष, गुल्म और लता आदि से युक्त होने से) सब ऋतुओं के अनुकूल, (चूना, रंग आदि से उपलिप्त होने से) शुभ्र, (वावली, पोखरा) जलाशयों तथा पेड़ों से युक्त अपना महल (राज-भवन) बनवावे।
रथ, घोड़ा, हाथी, छत्र, धन, धान्य (सब प्रकार के अन्न), पशु (गौ, भैंस आदि), खनियाँ (दासी आदि), सब तरह के द्रव्य (गुड़, नमक आदि) और कुष्य (सोना-चाँदी के अतिरिक्त अन्य ताँबा-पीतल आदि द्रव्य) को जो योद्धा जीतकर लाता है; वह उसी का होता है । (सोना, चाँदी, भूमि, रत्न आदि बहुमूल्य वस्तुएँ राजा की होती हैं)।