(राजा) सभी शास्रो का विद्वान्; इङ्गित (वचन तथा स्वर अर्थात् काकु आदि अभिप्रायसूचक भाव), आकार (क्रमशः प्रेम एवं उदासीनता का सूचक प्रसन्नता एवं उदासीनता) और चेष्टा (क्रोधादि का सूचक नेत्रों का लाल होना, भौह टेढ़ा, करना आदि) को जाननेवाले, शुद्धहृदय (राजधन को अधिक व्यय करना स्री-आसक्ति, द्यूत, मद्यपान आदि से रहित); चतुर तथा कुलीन दूत को नियुक्त करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।