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आध्यात्मिक परंपरानुसार विन्यस्त शास्त्रों का अवलोकन करें
षड्दर्शन
दर्शन भारतीय आस्तिक दार्शनिक परम्पराओं का समष्टि-रूप है, जिसमें सत्य, ज्ञान, आत्मा, ईश्वर, जगत्, कर्म और मोक्ष जैसे मूलभूत विषयों का तर्क, अनुभव और शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर विवेचन किया जाता है।
3 शास्त्र
उपनिषद
उपनिषद सनातन धर्म के दार्शनिक-धार्मिक ग्रंथ हैं, जो धर्म के मूल सिद्धांतों को विकसित और समझाते हैं।
0 शास्त्र
योगशास्त्र
योग शास्त्र योग के अभ्यास के बारे में ज्ञान या शिक्षा की एक पुस्तक को संदर्भित करता है।
0 शास्त्र
नीतिशास्त्र
नीति शास्त्र वे ग्रंथ हैं जो व्यक्ति और समाज के लिए आदर्श आचरण, नैतिक मूल्यों, राजनीति, कूटनीति और व्यवहारिक बुद्धि के सिद्धांतों को स्पष्ट करते हैं।
3 शास्त्र
पुराण
पुराण प्राचीन भारतीय ग्रंथ हैं जो सृष्टि, देवताओं, ऋषियों और राजाओं के इतिहास तथा धर्म, कर्म और जीवन मूल्यों का वर्णन करते हैं।
0 शास्त्र
प्रकरण ग्रंथ
प्रकरण ग्रन्थ वे दार्शनिक ग्रंथ हैं जो जटिल वेदांत सिद्धांतों को सरल और व्यवस्थित रूप में समझाने के लिए लिखे जाते हैं, ताकि साधक उन्हें आसानी से समझ सके।
0 शास्त्र
तंत्रशास्त्र
तंत्र शास्त्र ऐसे ग्रंथ हैं जो साधना, मंत्र, यंत्र और ध्यान की विशेष विधियों के माध्यम से आध्यात्मिक शक्ति और आत्म-साक्षात्कार का मार्ग बताते हैं।
0 शास्त्र
काव्यशास्त्र
काव्य शास्त्र वह विद्या है जो काव्य की रचना, भाषा, रस, अलंकार और छंद के माध्यम से उसकी अभिव्यक्ति और सौंदर्य के सिद्धांतों का अध्ययन करती है।
0 शास्त्र
स्मृति
धर्मशास्त्र वे ग्रंथ हैं जो धर्म, आचार, कर्तव्य, सामाजिक नियम और जीवन के नैतिक तथा धार्मिक आचरण के सिद्धांतों का निरूपण करते हैं।
0 शास्त्र
ज्योतिषशास्त्र
ज्योतिष शास्त्र वह विद्या है जो ग्रहों, नक्षत्रों और खगोलीय स्थितियों के आधार पर समय, घटनाओं और मानव जीवन के प्रभावों का अध्ययन करती है।
2 शास्त्र
श्रुति
वेद प्राचीनतम ग्रंथ हैं जिन्हें सनातन धर्म का आधार माना जाता है; इनमें ज्ञान, कर्म, उपासना और जीवन के आध्यात्मिक सिद्धांतों का निरूपण किया गया है।
0 शास्त्र
कामशास्त्र
कामशास्त्र वे ग्रंथ हैं जो मानव जीवन में काम (इच्छा) के सिद्धांतों, संबंधों, सौंदर्य और दाम्पत्य जीवन के संतुलित तथा सांस्कृतिक पक्षों का वर्णन करते हैं।
1 शास्त्र
इतिहास
इतिहास वे प्राचीन ग्रंथ हैं जो वास्तविक घटनाओं, राजाओं, युद्धों और धर्म-आधारित कथाओं के माध्यम से समाज, संस्कृति और जीवन मूल्यों का वर्णन करते हैं।
4 शास्त्र
आयुर्वेद
आयुर्वेद वह विद्या है जो धातुओं, खनिजों और औषधियों के प्रयोग द्वारा शरीर की चिकित्सा, पुनरुत्थान और दीर्घायु के सिद्धांतों का वर्णन करती है।
1 शास्त्र
नाट्यशास्त्र
नाट्य शास्त्र वह विद्या है जो नाटक, अभिनय, संगीत, नृत्य और रसों के माध्यम से भावों की अभिव्यक्ति और कला के सिद्धांतों का वर्णन करती है।
0 शास्त्र
गीता संग्रह
गीता वे ग्रंथ हैं जो संवाद के रूप में जीवन, कर्म, भक्ति और ज्ञान के माध्यम से धर्म और आत्मबोध का मार्ग प्रस्तुत करते हैं।
0 शास्त्र
जीवनी
जीवनी वह साहित्य है जिसमें किसी व्यक्ति के जीवन, कार्यों, विचारों और उनके प्रभाव का वर्णन किया जाता है।
1 शास्त्र
शाक्त शास्त्र
शाक्त शास्त्र वे ग्रंथ हैं जो आदिशक्ति (देवी) की उपासना, साधना, तंत्र और शक्ति-तत्व के दार्शनिक तथा आध्यात्मिक सिद्धांतों का वर्णन करते हैं।
0 शास्त्र
उत्तरमीमांसा
उत्तरमीमांसा, जिसे वेदान्त भी कहा जाता है, हिन्दू दर्शन की वह शाखा है जो उपनिषद्, भगवद्गीता और ब्रह्मसूत्र पर आधारित है। इसका मुख्य विषय ब्रह्म, आत्मा, जगत् और मोक्ष का स्वरूप है। अद्वैत, विशिष्टाद्वैत, द्वैत आदि इसके प्रमुख सम्प्रदाय हैं, जो इन ग्रन्थों की भिन्न-भिन्न व्याख्या प्रस्तुत करते हैं।
0 शास्त्र
अद्वैत
अद्वैत वेदान्त उत्तरमीमांसा (वेदान्त) का प्रमुख सम्प्रदाय है, जिसका व्यवस्थित प्रतिपादन आदि शङ्कराचार्य ने किया। इसके अनुसार ब्रह्म ही एकमात्र परम सत्य है, जबकि जगत् मायिक है और जीव तथा ब्रह्म में वास्तविक भेद नहीं है। आत्मज्ञान के द्वारा जीव अपनी ब्रह्मस्वरूपता का साक्षात्कार कर मोक्ष प्राप्त करता है।
0 शास्त्र
विशिष्टाद्वैत
विशिष्टाद्वैत वेदान्त उत्तरमीमांसा (वेदान्त) का प्रमुख सम्प्रदाय है, जिसका प्रतिपादन श्री रामानुजाचार्य ने किया। इसके अनुसार ब्रह्म (भगवान नारायण) ही परम सत्य हैं, तथा जीव और जगत् ब्रह्म से अभिन्न होते हुए भी उनके विशिष्ट स्वरूप (विशेषण) हैं। यह दर्शन भक्ति, ईश्वर-कृपा और शरणागति को मोक्ष का प्रमुख साधन मानता है।
0 शास्त्र
द्वैत
द्वैत वेदान्त उत्तरमीमांसा (वेदान्त) का प्रमुख सम्प्रदाय है, जिसका प्रतिपादन श्री मध्वाचार्य ने किया। इसके अनुसार भगवान विष्णु परम स्वतंत्र एवं सर्वोच्च सत्य हैं, जबकि जीव और जगत् उनसे सदा भिन्न और उन पर आश्रित हैं। यह दर्शन भक्ति और ईश्वर की कृपा को मोक्ष का प्रमुख साधन मानता है।
0 शास्त्र
द्वैताद्वैत
द्वैताद्वैत वेदान्त उत्तरमीमांसा (वेदान्त) का एक प्रमुख सम्प्रदाय है, जिसका प्रतिपादन श्री निम्बार्काचार्य ने किया। इसके अनुसार जीव और जगत् ब्रह्म से भिन्न भी हैं और अभिन्न भी। यह भेद और अभेद का सम्बन्ध स्वाभाविक माना गया है। यह दर्शन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति तथा ईश्वर-कृपा को मोक्ष का प्रमुख साधन मानता है।
0 शास्त्र
शुद्धाद्वैत
शुद्धाद्वैत वेदान्त उत्तरमीमांसा (वेदान्त) का एक प्रमुख सम्प्रदाय है, जिसका प्रतिपादन श्री वल्लभाचार्य ने किया। इसके अनुसार ब्रह्म (श्रीकृष्ण) ही एकमात्र परम सत्य हैं, तथा जगत् उनकी वास्तविक लीला और अभिव्यक्ति है, न कि माया। यह दर्शन पुष्टिमार्ग, भगवान की कृपा और प्रेममयी भक्ति को मोक्ष का प्रमुख साधन मानता है।
0 शास्त्र
भेदाभेद
भेदाभेद वेदान्त उत्तरमीमांसा (वेदान्त) का एक प्राचीन सम्प्रदाय है, जिसके प्रमुख आचार्यों में भास्कराचार्य का विशेष स्थान है। इसके अनुसार जीव और जगत् ब्रह्म से भिन्न भी हैं और अभिन्न भी। यह दर्शन भेद और अभेद दोनों को वास्तविक मानते हुए उनके समन्वय का प्रतिपादन करता है।
0 शास्त्र
अचिन्त्यभेदाभेद
अचिन्त्यभेदाभेद वेदान्त उत्तरमीमांसा (वेदान्त) का एक प्रमुख सम्प्रदाय है, जिसका प्रतिपादन श्री चैतन्य महाप्रभु की परम्परा में किया गया। इसके अनुसार जीव और जगत् ब्रह्म (श्रीकृष्ण) से एक साथ भिन्न भी हैं और अभिन्न भी, तथा यह सम्बन्ध अचिन्त्य अर्थात् मानव बुद्धि से पूर्णतः परे है। यह दर्शन भगवान श्रीकृष्ण की प्रेमभक्ति को मोक्ष का सर्वोच्च साधन मानता है।
0 शास्त्र
शिवाद्वैत
शिवाद्वैत वेदान्त उत्तरमीमांसा (वेदान्त) का एक प्रमुख शैव सम्प्रदाय है, जिसका प्रतिपादन श्रीकण्ठाचार्य ने किया। इसके अनुसार भगवान शिव ही परब्रह्म हैं, तथा जीव और जगत् उनकी शक्ति एवं स्वरूप से अविभाज्य होते हुए भी अपनी विशिष्ट सत्ता रखते हैं। यह दर्शन शिवभक्ति, ईश्वर-कृपा और आत्मज्ञान के माध्यम से मोक्ष का मार्ग बताता है।
0 शास्त्र
पूर्वमीमांसा
पूर्वमीमांसा हिन्दू दर्शन की वह शाखा है जो मुख्यतः वेदों के कर्मकाण्ड, यज्ञ, विधि-विधान तथा धर्म की मीमांसा करती है। इसका आधार मुख्य रूप से जैमिनि ऋषि द्वारा रचित मीमांसा सूत्र है। यह दर्शन वेदों की अपौरुषेयता, वैदिक कर्मों की अनिवार्यता तथा उनके फल का तर्कपूर्ण विवेचन प्रस्तुत करता है।
0 शास्त्र
भट्ट
भट्ट मत पूर्वमीमांसा का प्रमुख सम्प्रदाय है, जिसका प्रतिपादन कुमारिल भट्ट ने किया। यह वेदों की अपौरुषेयता, वैदिक कर्मों की प्रामाणिकता तथा धर्म के निर्धारण में वैदिक विधियों के सर्वोच्च महत्व का प्रतिपादन करता है। इस परम्परा ने बौद्ध और अन्य दर्शनों के साथ गहन दार्शनिक संवाद भी किया।
0 शास्त्र
प्राभाकर
प्राभाकर मत पूर्वमीमांसा का प्रमुख सम्प्रदाय है, जिसका प्रतिपादन आचार्य प्रभाकर ने किया। यह वेदों की अपौरुषेयता, वैदिक कर्मों तथा धर्म की व्याख्या पर विशेष बल देता है। ज्ञान, कर्तव्य और वैदिक विधि के विषय में इसकी अनेक मान्यताएँ भट्ट मत से भिन्न हैं।
0 शास्त्र
योग
योगदर्शन हिन्दू दर्शन की वह शाखा है जो मन, चित्त और इन्द्रियों के संयम के माध्यम से आत्मसाक्षात्कार और मोक्ष का मार्ग प्रस्तुत करती है। इसका आधार महर्षि पतञ्जलि द्वारा रचित योगसूत्र है। यह दर्शन अष्टाङ्गयोग के माध्यम से साधक को चित्तवृत्तियों के निरोध और परम शान्ति की ओर अग्रसर करता है।
0 शास्त्र
सांख्य
सांख्यदर्शन हिन्दू दर्शन की प्राचीनतम शाखाओं में से एक है, जो पुरुष (चेतन आत्मा) और प्रकृति (जड़ प्रकृति) के भेद का तात्त्विक विवेचन करती है। परम्परानुसार इसके प्रवर्तक महर्षि कपिल माने जाते हैं। यह दर्शन सृष्टि की रचना, प्रकृति के चौबीस तत्त्वों तथा पुरुष के स्वरूप का विश्लेषण करते हुए विवेक के माध्यम से मोक्ष का मार्ग बताता है।
0 शास्त्र
वैशेषिक
वैशेषिकदर्शन हिन्दू दर्शन की वह शाखा है जो पदार्थों, उनके गुणों, कर्मों तथा सृष्टि के मूल तत्त्वों का विश्लेषण करती है। इसके प्रवर्तक महर्षि कणाद माने जाते हैं, जिन्होंने वैशेषिकसूत्र की रचना की। यह दर्शन द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय तथा अभाव जैसे पदार्थों के माध्यम से जगत् के स्वरूप का तर्कपूर्ण विवेचन प्रस्तुत करता है।
0 शास्त्र
न्याय
न्यायदर्शन हिन्दू दर्शन की वह शाखा है जो तर्क, प्रमाण और युक्तिपूर्ण विचार के माध्यम से सत्य के ज्ञान की प्राप्ति का मार्ग बताती है। इसके प्रवर्तक महर्षि गौतम (अक्षपाद गौतम) माने जाते हैं, जिन्होंने न्यायसूत्र की रचना की। यह दर्शन प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द जैसे प्रमाणों के आधार पर ज्ञान की सत्यता तथा यथार्थ का विवेचन करता है।
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प्राचीन न्याय
प्राचीन न्याय न्यायदर्शन की प्रारम्भिक परम्परा है, जिसका आधार महर्षि गौतम द्वारा रचित न्यायसूत्र है। यह तर्क, प्रमाण, अनुमान और यथार्थ ज्ञान के माध्यम से सत्य की प्राप्ति तथा मिथ्या ज्ञान के निराकरण का विवेचन करती है। इस परम्परा ने भारतीय तर्कशास्त्र की आधारशिला स्थापित की।
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नव्य न्याय
नव्य न्याय न्यायदर्शन की विकसित परम्परा है, जिसका प्रवर्तन आचार्य गङ्गेश उपाध्याय ने तत्त्वचिन्तामणि के माध्यम से किया। यह तर्क, प्रमाण, भाषा और ज्ञानमीमांसा का अत्यन्त सूक्ष्म एवं विश्लेषणात्मक विवेचन प्रस्तुत करता है। इस परम्परा ने भारतीय दार्शनिक तर्कशास्त्र को नई दिशा प्रदान की।
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वेद
वेद हिन्दू धर्म के प्राचीनतम एवं सर्वोच्च प्रमाण माने जाने वाले श्रुति ग्रन्थ हैं। इन्हें अपौरुषेय अर्थात् मानव-रचित नहीं माना जाता और ऋषियों ने इन्हें दिव्य ज्ञान के रूप में श्रवण किया। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद—ये चार वेद धर्म, यज्ञ, उपासना, ज्ञान तथा जीवन के विविध आयामों का आधार हैं।
0 शास्त्र
ब्राह्मण
ब्राह्मण ग्रन्थ वेदों के गद्यात्मक भाग हैं, जिनमें यज्ञों, वैदिक अनुष्ठानों, मन्त्रों के प्रयोग तथा उनके उद्देश्य का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। ये ग्रन्थ वैदिक कर्मकाण्ड की व्याख्या करते हैं तथा वेदों के मन्त्रभाग को समझने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।
0 शास्त्र
आरण्यक
आरण्यक ग्रन्थ वेदों का वह भाग हैं जो कर्मकाण्ड और ज्ञानकाण्ड के मध्य सेतु का कार्य करते हैं। इनमें यज्ञों के बाह्य स्वरूप के साथ-साथ उनके आन्तरिक एवं आध्यात्मिक अर्थ का विवेचन किया गया है। इन ग्रन्थों का अध्ययन परम्परानुसार वन (अरण्य) में रहने वाले साधकों द्वारा किया जाता था, इसी कारण इन्हें आरण्यक कहा गया।
0 शास्त्र
उपनिषद्
उपनिषद् वेदों का अंतिम एवं दार्शनिक भाग हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से वेदान्त कहा जाता है। इनमें ब्रह्म, आत्मा, जगत्, कर्म और मोक्ष जैसे गहन आध्यात्मिक विषयों का विवेचन किया गया है। गुरु-शिष्य संवाद के माध्यम से प्रस्तुत ये ग्रन्थ आत्मज्ञान और परम सत्य की अनुभूति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
0 शास्त्र
धर्मशास्त्र
धर्मशास्त्र स्मृति साहित्य की वह शाखा है जिसमें धर्म, आचार, व्यवहार, सामाजिक व्यवस्था, संस्कार, वर्णाश्रम धर्म तथा राजधर्म जैसे विषयों का व्यवस्थित विवेचन किया गया है। मनुस्मृति, याज्ञवल्क्यस्मृति और नारदस्मृति जैसे ग्रन्थ इस परम्परा के प्रमुख उदाहरण हैं। इनका उद्देश्य व्यक्तिगत, सामाजिक और धार्मिक जीवन के आचरण का मार्गदर्शन करना है।
0 शास्त्र
गृह्यसूत्र
गृह्यसूत्र वैदिक कल्पसूत्रों का एक अंग हैं, जिनमें गृहस्थ जीवन, संस्कारों तथा घरेलू वैदिक अनुष्ठानों का संक्षिप्त एवं व्यवस्थित वर्णन किया गया है। इनमें गर्भाधान से लेकर अन्त्येष्टि तक के षोडश संस्कार, विवाह, उपनयन तथा अन्य गृह्य कर्मों की विधियाँ वर्णित हैं।
0 शास्त्र
स्मृतिग्रन्थ
स्मृतिग्रन्थ वे ग्रन्थ हैं जो श्रुति (वेद) के सिद्धान्तों पर आधारित होकर धर्म, आचार, व्यवहार, संस्कार तथा सामाजिक जीवन का मार्गदर्शन करते हैं। ऋषियों द्वारा रचित ये ग्रन्थ विभिन्न कालों और परिस्थितियों के अनुसार धर्म के व्यावहारिक स्वरूप का निरूपण करते हैं।
0 शास्त्र
महापुराण
महापुराण पुराण साहित्य के प्रमुख ग्रन्थ हैं, जिनमें सृष्टि की उत्पत्ति, देवताओं, ऋषियों, राजाओं के वंश, मन्वन्तरों, अवतारों, धर्म, भक्ति तथा मोक्ष का विस्तृत वर्णन मिलता है। परम्परा में इनकी संख्या अठारह (१८) मानी जाती है, जिनमें भागवत, विष्णु, शिव, मार्कण्डेय आदि प्रमुख हैं।
0 शास्त्र
उपपुराण
उपपुराण पुराण साहित्य के वे ग्रन्थ हैं जो धर्म, भक्ति, तीर्थ, व्रत, देवताओं, ऋषियों तथा विभिन्न धार्मिक परम्पराओं का विस्तृत वर्णन करते हैं। ये महापुराणों के पूरक माने जाते हैं और अनेक विशिष्ट विषयों तथा क्षेत्रीय परम्पराओं का विस्तारपूर्वक निरूपण करते हैं।
0 शास्त्र
स्थालपुराण
स्थलपुराण ऐसे पुराण ग्रन्थ हैं जिनमें किसी विशिष्ट तीर्थ, मंदिर, पवित्र स्थान या क्षेत्र की उत्पत्ति, महिमा, देवता, पौराणिक घटनाओं तथा वहाँ सम्पन्न होने वाले व्रत, उत्सव और धार्मिक परम्पराओं का वर्णन किया जाता है। इनका उद्देश्य उस पवित्र स्थल के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व का निरूपण करना है।
0 शास्त्र
आगम-तन्त्र
आगम-तन्त्र हिन्दू धर्म के वे ग्रन्थ हैं जिनमें उपासना, मन्त्र, यन्त्र, ध्यान, मंदिर-निर्माण, मूर्ति-प्रतिष्ठा, पूजा-विधि तथा साधना का विस्तृत निरूपण किया गया है। शैव, शाक्त और वैष्णव परम्पराओं के अनेक आगम एवं तन्त्र ग्रन्थ धार्मिक आचार, उपासना और आध्यात्मिक साधना के महत्वपूर्ण आधार हैं।
0 शास्त्र
शैव
शैव आगम भगवान शिव की उपासना पर आधारित आगम-तन्त्र परम्परा के ग्रन्थ हैं। इनमें मन्त्र, पूजा-विधि, योग, ध्यान, मंदिर-निर्माण, मूर्ति-प्रतिष्ठा तथा आध्यात्मिक साधना का विस्तृत निरूपण मिलता है। शैव परम्परा के विभिन्न सम्प्रदायों की उपासना और दर्शन का आधार इन्हीं ग्रन्थों में निहित है।
0 शास्त्र
शाक्त
शाक्त तन्त्र देवी आदि शक्ति की उपासना पर आधारित आगम-तन्त्र परम्परा के ग्रन्थ हैं। इनमें मन्त्र, यन्त्र, पूजा-विधि, ध्यान, साधना तथा आध्यात्मिक उपासना का विस्तृत वर्णन मिलता है। ये ग्रन्थ शक्ति को परम तत्त्व मानते हुए भक्ति, साधना और आत्मोन्नति का मार्ग प्रस्तुत करते हैं।
0 शास्त्र
वैष्णव
वैष्णव आगम भगवान विष्णु एवं उनके अवतारों की उपासना पर आधारित आगम-तन्त्र परम्परा के ग्रन्थ हैं। इनमें मन्त्र, पूजा-विधि, मंदिर-निर्माण, मूर्ति-प्रतिष्ठा, ध्यान तथा भक्ति-साधना का विस्तृत निरूपण किया गया है। पाञ्चरात्र और वैखानस आगम इस परम्परा के प्रमुख ग्रन्थ माने जाते हैं।
0 शास्त्र
महाकाव्य
महाकाव्य संस्कृत साहित्य की उत्कृष्ट काव्य रचनाएँ हैं, जिनमें राजाओं, महापुरुषों, देवताओं या ऐतिहासिक एवं पौराणिक घटनाओं का काव्यात्मक और अलंकारपूर्ण वर्णन किया गया है। इन ग्रन्थों में साहित्यिक सौन्दर्य, नीति, धर्म और आदर्श जीवन का समन्वय मिलता है। रघुवंश, कुमारसम्भव और किरातार्जुनीयम् इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
0 शास्त्र
नाटक
नाटक संस्कृत साहित्य की प्रमुख नाट्य विधा है, जिसमें संवाद, अभिनय, रस और भाव के माध्यम से कथाओं का प्रस्तुतीकरण किया जाता है। इनमें धर्म, नीति, प्रेम, वीरता और आध्यात्मिक आदर्शों का कलात्मक चित्रण मिलता है। अभिज्ञानशाकुन्तलम्, मृच्छकटिकम् और उत्तररामचरितम् इसके प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
0 शास्त्र
सुभाषित
सुभाषित संस्कृत साहित्य के ऐसे संक्षिप्त, सारगर्भित और अर्थपूर्ण पद्य हैं, जिनमें धर्म, नीति, सदाचार, ज्ञान, वैराग्य, भक्ति और जीवन-दर्शन का उपदेश दिया गया है। ये श्लोक अपनी सरलता, गहन अर्थ और व्यावहारिक शिक्षा के कारण भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं।
0 शास्त्र
व्याकरण
व्याकरण संस्कृत भाषा के शब्दरूप, धातु, संधि, समास, प्रत्यय तथा वाक्य-रचना के नियमों का शास्त्र है। यह शुद्ध भाषा-प्रयोग और वैदिक एवं संस्कृत ग्रन्थों के सही अध्ययन का आधार माना जाता है। पाणिनि की अष्टाध्यायी इस परम्परा का सर्वाधिक प्रसिद्ध ग्रन्थ है।
0 शास्त्र
रामकाव्य
रामकाव्य भारतीय काव्य परम्परा की वह शाखा है जिसमें भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्श, चरित्र और लीलाओं का काव्यात्मक वर्णन किया गया है। इस परम्परा में संस्कृत, हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में रचित अनेक ग्रन्थ सम्मिलित हैं।
0 शास्त्र
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
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