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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 69
जाङ्गलं सत्यसम्पन्नमार्यप्रायमनाविलम्‌ । रम्यमानतसामन्तं स्वाजीव्यं देशमावसेत्‌ ।।
(राजा) जाङ्गल, धान्य और अधिक धर्मात्माओं से युक्त आकुलतारहित, (फल-फूल, लता-वृक्षादि से) रमणीय, जहाँ आस-पास के निवासी नम्र हों, ऐसे अपनी आजीविका (सुलभ व्यापार, खेती आदि) वाले देश में निवास करे।
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