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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 123
राज्ञो हि रक्षाधिकृताः परस्वादायिनः शठाः । भृत्या भवन्ति प्रायेण तेभ्यो रक्षेदिमाः प्रजाः ।।
राजा के रक्षाधिकारी प्राय: दूसरों का धन लेने वाले (घूसखोर) हुआ करते हैं, उन शठों से (राजा) इन प्रजाओं की रक्षा किया करे।
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