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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 122
स ताननुपरिक्रामेत्सवनिन सदा स्वयम्‌ । तेषां वृत्तं परिणयेत्सभ्यग्रष्ट्रेषु तच्चरैः ।।
नगर में नियुक्त वह उच्चपदाधिकारी उन (ग्रामाधिपति आदि) (७।११५११६) का सर्वदा स्वयं निरीक्षण करता रहे और दूतो के द्वारा राज्यों में उन ग्रामाधिपतियों के कार्य, वर्ताव आदि व्यवहार को मालूम करता रहे।
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