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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 115
ग्रामस्याधिपतिं कुर्याद्दशग्रामपति तथा । विंशतीशं शतेशं च सहस्त्रपतिमेव च ।।
(राजा) एक-एक, दश-दश, बीस-बीस, सौ-सौ तथा हजार-हजार गाँवों का एक-एक रक्षक नियुक्त करे।
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