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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 101
एतच्चतुर्विधं विद्यात्पुरुषार्थप्रयोजनम्‌ । अस्य नित्यमनुष्ठानं सम्यक्कुर्यादतन्द्रितः ।।
(राजा) चार प्रकार के पुरुषार्थो का यह प्रयोजन जाने तथा आलस्यरहित होकर सर्वदा इसका पालन करे।
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