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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 26
तस्याहुः सम्प्रणेतारं राजानं सत्यवादिनम्‌ । समीक्ष्यकारिणं प्राज्ञं धर्मकामार्थकोविदम्‌ ।।
(मनु आदि महर्षियों ने) उस दण्ड प्रयोग करनेवाले राजा (या अन्य राजनियुक्त शासक) को सत्यवादी, विचारकर करने वाला, बुद्धिमान्‌ और धर्म तथा अर्थ का जानकार होना बतलाया है।
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