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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 9
एकमेव दहत्यभ्निर्रं दुरुपसर्पिणम्‌ । कुलं दहति राजाग्निः सपशुद्रव्यसञ्जयम्‌ ।।
(अब राजापमान का दृष्ट दोष कहते हैं-) अग्नि केवल असावधानी से स्पर्श करने वाले को ही जलाती है, किन्तु राजाग्नि (क्रुद्धराजस्वरूप अग्नि) चिरसञ्चित पशु तथा धन के सहित समस्त कुल (वंश) को ही जला देती है।
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