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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 156
एताः प्रकृतयो मूलं मण्डलस्य समासतः । अष्टौ चान्याः समाख्याता द्वादशैव तु ताः स्मृताः ।।
राजमण्डल की ये चार (मध्यम, विजिगीषु, उदासीन और शत्रु) मूल प्रकृतियाँ है । इस प्रकार कुल मिलाकर राजमण्डल की बारह प्रकृतियाँ हुई।
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