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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 60
अन्यानपि प्रकुर्वीत शुचीन्प्राज्ञानवस्थितान्‌ । सम्यगर्थसमाहर्तृनमात्यान्सुपरीक्षितान्‌ ।।
(राजा इसके अलावे) दूसरे भी शुद्ध (वंशपरम्परा से शुद्ध या घूस आदि न लेने से शुद्ध हदय वाले), बुद्धिमान्‌, स्थिरचित्त (आपत्ति-काल में भी नही घबड़ानेवाले या किसी के दबाव या लोभ होने पर भी राज-हित में ही दृढ रहने वाले), सब प्रकार न्यायपूर्वक धन-धान्य उत्पन्न करने वाले सुपरीक्षित मन्त्रियों को नियुक्त करे।
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