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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 193
सेनापतिबलाध्यक्षौ सर्वदिक्षु निवेशयेत्‌ । यतश्च भयमाशङ्केत्प्राचीं तां कल्पयेद्विशम्‌ ।।
(राजा) सेनापति तथा बलाध्यक्ष को सब दिशाओं में फैलाकर नियुक्त करे तथा जिस दिशा की ओर से भय की आशङ्का हो, उस दिशा को पूर्व दिशा मान कर आगे उसी दिशा को करे।
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