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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 96
यच्चास्य सुकृतं किंचिदमुत्रार्थमुपार्जितम्‌ । भर्त्ता तत्सर्वमादत्ते परावृत्तहतस्य तु ।।
डरकर युद्ध से पराङ्मुख होने पर शत्रु से अभिहत योद्धा का परलोक के लिए उपार्जित जो कुछ पुण्य है, वह सब स्वामी (उस योद्धा को वेतन देने वाला राजा आदि) प्राप्त कर लेता है।
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