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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 23
देवदानवगन्धर्वा रक्षांसि पतगोरगाः । तेऽपि भोगाय कल्पन्ते दण्डेनैव निपीडिताः ।।
देव (इन्द्र, अग्नि, सूर्य, वायु आदि), दानव, गन्धर्व, राक्षस, पक्षी और सर्प (नाग) - वे भी (परमात्मा के) दण्ड के भय से पीड़ित होकर भोग (वर्षा आदि) करने के लिए प्रवृत्त होते हैं।
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