मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 199
उपरुध्यारिमासीत राष्ट्रं चास्योपपीडयेत्‌ । दूषयेच्चास्य सततं यवसान्नोदकेन्धनम्‌ ।।
(राजा दुर्ग के बाहर स्थित) शत्रु पर घेरा डालकर रहे, इसके देश को (लूटपाट आदि से) पडित करे और इसके भूसा, घास, अन्न, जल, और ईधन को सर्वदा नष्ट करे अर्थात्‌ दूषित द्रव्य (विष आदि) मिलाकर उपयोग के अयोग्य बना दे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें