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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 175
यदा मन्येत भावेन हृष्टं पुष्टं बलं स्वकम्‌ । परस्य विपरीतं च तदा यायाद्रिषुं प्रति ।।
जब राजा अपनी सेना आदि को हृष्ट-पुष्ट (बलवती) तथा शत्रु की सेना आदि को इसके विपरीत (दुर्बल) समझे तब उस पर चढ़ाई कर दे।
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