सब आपत्तियों (कोषक्षय, अमात्यादि प्रकृतिकोप तथा मित्रादिव्यसन प्रभृति) को अधिक मात्रा में एक साथ उपस्थित जानकर विद्वान् राजा (घबड़ाये नहीं, किन्तु) सम्मिलित या पृथक्-पृथक् सब उपायों (साम, दान, दण्ड और भेद) को काम में लावे।
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