मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 187
अन्येष्वपि तु कालेषु यदा पश्येदश्नुवं जयम्‌ । तदा यायाद्विगृह्मौव व्यसने चोत्थिते रिपोः ।।
दूसरे समय भी जब राजा अपनी विजय निश्चित समझे अपने सैन्यबल से युक्त हो; तब विग्रहकर शत्रु पर चढ़ाई करे और जब शत्रु को अमात्य आदि के विरोध (फूट-बैर) या कठोर दण्ड आदि से व्यसन में पड़ा हुआ समझे तब भी (ग्रीष्म आदि) अन्य समय में शत्रु पर चढ़ाई करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें