दूसरे समय भी जब राजा अपनी विजय निश्चित समझे अपने सैन्यबल से युक्त हो; तब विग्रहकर शत्रु पर चढ़ाई करे और जब शत्रु को अमात्य आदि के विरोध (फूट-बैर) या कठोर दण्ड आदि से व्यसन में पड़ा हुआ समझे तब भी (ग्रीष्म आदि) अन्य समय में शत्रु पर चढ़ाई करे।
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