ततो दुर्ग च राष्ट्रं च लोकं च सचराचरम् ।
अन्तरिक्षगतांश्चैव मुनीन्देवांश्च पीडयेत् ।।
फिर अर्थात् सबान्धव राजा को नष्ट करने के बाद (बिना दोष का विचार किये प्रयुक्त किया गया दण्ड) किला, राज्य चराचर के सहित पृथ्वी तथा अन्तरिक्षगामी मुनियों एवं देवताओं को (यज्ञादि भाग न मिलने से) पीड़ित करता है।
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