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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 205
जित्वा सम्पूजयेद्देवान्ब्राह्मणांश्चैव धार्मिकान्‌ । प्रदद्यात्परिहारार्थं ख्यापयेदभयानि च ।।
विजय लाभ कर देवताओं तथा धार्मिक ब्राह्मणों को गो, भूमि तथा सुवर्ण आदि दान देकर पूजा करे । जीती गयी वस्तुओं में-से इतना अंश देवताओं तथा ब्राह्मणों के लिए मैंने दान दिया” ऐसा वहाँ के निवासियों में घोषणा करे तथा “राजभक्ति में जिन लोगों ने अपने राजा का पक्ष लेकर मेरे विरुद्ध आचरण किया है उन्हें भी मैं अभयदान देता हूँ” (वे निर्भय होकर अपने-कार्यो को करें) ऐसी भी घोषणा करे।
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