यदि न प्रणयेद्राजा दण्डं दण्ड्येष्वतन्द्रितः ।
शूले मत्स्यानिवापक्ष्यन्दुर्बलान्बलवत्तराः ।।
यदि राजा आलस्य छोड़कर दण्ड के योग्यों (अपराधियों) में दण्ड का प्रयोग नहीं करता, तो बलवान् लोग दुर्बलों को, जैसे मछलियों को लोहे के छड में छेदकर पकाते हैं, वैसे पकाने लगते हैं।
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