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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 157
अमात्यराष्ट्रदुर्गार्थदण्डाख्याः पञ्च चापराः । प्रत्येक कथिता ह्येताः संक्षेपेण द्विसप्ततिः ।।
-राजमण्डल की पूर्वोक्त (७।१५६) १२ प्रकृतियों में से प्रत्येक की- १. अमात्य (प्रधान मन्त्री), २. राष्ट्र; ३. दुर्ग (किला), ४. अर्थ (धनकोष) और ५. दण्ड ये ५ द्रव्यप्रकृतियाँ हें (अत: १२५६० द्रव्य प्रकृतियाँ होती हैं) तथा पूर्वोक्त (७।१५६) १२ प्रकृतियों को सम्मिलित कर (६०+ १२=७२) राजमण्डल की कुल ७२ प्रकृतियाँ मुनियों ने कही हैं।
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