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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 83
न तं स्तेना च चामित्रा हरन्ति न च नश्यति । तस्माद्राज्ञा निधातव्यो ब्राह्मणेष्वक्षयो निधिः ।।
उस (सत्पात्र ब्राह्मण में दिये गये दान रूप कोष) को चोर नहीं चुराते, शत्रु नहीं छीनते और वह नष्ट नहीं होता है, अतएव राजा ब्राह्मणों में अक्षय कोष रखे (ब्राह्मणों को दान दे)।
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