सर्वोपायैस्तथा कुर्यान्नीतिज्ञः पृथिवीपतिः ।
यथाऽस्याभ्यधिका न स्युर्मित्रोदासीनशत्रवः ।।
राजा सब उपायों (साम, दाम, दण्ड और भेद) से ऐसा करे कि जिससे इसके शत्रु, मित्र तथा उदासीन अधिक न होवें।
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