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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 160
सन्धिं च विग्रहं चैव यानमासनमेव च । द्वैधीभावं संश्रयं च षड्गुणांश्चिन्तयेत्सदा ।।
सन्धि, विग्रह, यान, आसन, द्वैधीभाव और संश्रय - इन छः गुणों का सर्वदा विचार करे।
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