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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 76
तस्य मध्ये सुपर्याप्तं कारयेद्गृहमात्मनः । गुप्तं सर्वर्तुक शुभ्रं जलवृक्षसमन्वितम्‌ ।।
राजा उस (किले) के बीच में (स्त्री-गृह, देव मन्दिर, अग्निशाला, स्नानागार आदि भवनों के अलग-अलग होने से) बड़ा, (खाई, परकोटा अर्थात्‌ चहारदीवारी, सेना आदि से) सुरक्षित (सब ऋतुओं में फलने-फूलनेवाले वृक्ष, गुल्म और लता आदि से युक्त होने से) सब ऋतुओं के अनुकूल, (चूना, रंग आदि से उपलिप्त होने से) शुभ्र, (वावली, पोखरा) जलाशयों तथा पेड़ों से युक्त अपना महल (राज-भवन) बनवावे।
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