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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 62
तेषामर्थे नियुञ्जीत शूरान्दक्षान्कु लोद्नतान्‌ । शुचीनाकरकर्मान्ते भीरूनन्तर्निवेशने ।।
(राजा) उन (मन्त्रियो) में से शूरवीर, उत्साही, कुलीन या कुलक्रमागत, शुद्धचित्त (घूस न लेने वाले और चोरी अर्थात्‌ गवन नहीं करने वाले) मन्त्रियों को धन-धान्य के संग्रह करने में (सोने आदि के खानों तथा अन्न उत्पादक स्थानों में) और भीरु (डरने वालों) को महल (रनिवास, भोजन-गृह, शयन, गृह आदि) में नियुक्त करे।
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