सोऽसहायेन मूढेन लुब्धेनाकृतबुद्धिना ।
न शक्यो न्यायतो नेतुं सक्तेन विषयेषु च ।।
असहाय, मूर्ख, लोभी, शास्र-ज्ञान-हीन और विषयों में आसक्त (राजा आदि) के द्वारा न्यायपूर्वक दण्डप्रयोग नहीं किया जा सकता है।
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