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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 80
सांवत्सरिकमाप्तैश्व राष्ट्रादाहारयेहलिम्‌ । स्याच्चाम्नायपरो लोके वर्तेत पितृवन्नषु ।।
(राजा) विश्वासपात्रों से वार्षिक कर वसूल करावे और लोगों से (कर लेने) में न्याययुक्त बर्ताव करे और मनुष्यों में (राजा) पिता के समान बर्ताव करे।
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