राज्ञश्च दद्युरुदद्धारमित्येषा वैदिकी श्रुतिः ।
राज्ञा च सर्वयोधेभ्यो दातव्यमपृथग्जितम् ।।
(युद्ध में विजय करने वाले योद्धा) 'राजा के लिए उद्धार (सोना, चाँदी जवाहरात तथा हाथी, घोड़ा! भी देवें' यह वैदिक वचन है और राजा विजयी योद्धाओं के लिए सम्मिलित रूप में जीतकर प्राप्त किये द्रव्यो में से प्रत्येक पुरुषार्थ के अनुसार विभाग देवे)।
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