तान्सर्वानभिसन्दध्यात्सामादिभिरुपक्र मैः ।
व्यस्तैश्चैव समस्तैश्च पौरुषेण नयेन च ।।
राजा अलग-अलग या मिले हुए सामादि (साम, दाम, भेद और दण्ड) उपायों से, पुरुषार्थ से और नीति से उन सबको अपने वश में करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।