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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 159
तान्सर्वानभिसन्दध्यात्सामादिभिरुपक्र मैः । व्यस्तैश्चैव समस्तैश्च पौरुषेण नयेन च ।।
राजा अलग-अलग या मिले हुए सामादि (साम, दाम, भेद और दण्ड) उपायों से, पुरुषार्थ से और नीति से उन सबको अपने वश में करे।
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