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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 129
यथा फलेन युज्येत राजा कर्त्ता च कर्मणाम्‌ । तथावेक्ष्य नृपो राष्ट्रे कल्पयेत्सततं करान्‌ ।।
जिस प्रकार राजा देखभाल आदि के और व्यापारी व्यापार आदि के फल से युक्त रहे (दोनों को अपने-अपने उद्योग के अनुसार उचित फल मिले) वैसा देख (अच्छी तरह विचार) कर राजा सर्वदा निश्चयकर राज्य में कर लगावे।
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