यथा फलेन युज्येत राजा कर्त्ता च कर्मणाम् ।
तथावेक्ष्य नृपो राष्ट्रे कल्पयेत्सततं करान् ।।
जिस प्रकार राजा देखभाल आदि के और व्यापारी व्यापार आदि के फल से युक्त रहे (दोनों को अपने-अपने उद्योग के अनुसार उचित फल मिले) वैसा देख (अच्छी तरह विचार) कर राजा सर्वदा निश्चयकर राज्य में कर लगावे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।