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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 91
न कूटैरायुधैर्हन्याद्युध्यमानो रणे रिपून्‌ । न कर्णिभिर्नापि दिग्धैर्नाग्रिज्वलिततेजनैः ।।
युद्ध करता हुआ (राजा या कोई योद्धा) कूटशस्त्र (बाहर में लकड़ी आदि तथा भीतर में घातक तीक्ष्ण शस्त्र या लोहा आदि से युक्त शस्त्र); कर्णिके आकार वाला फल (बाण का अगला भाग), विषादि में बुझाये गये, अग्नि से प्रज्वलित अग्रभाग वाले शस्रो से शत्रुओं को न मारे।
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