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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 65
अमात्ये दण्ड आयत्तो दण्डे वैनयिकी क्रिया । नृपतौ कोशराष्ट्रे च दूते संधिविपर्ययौ ।।
सेनापति के अधीन दण्ड (हाथी, घोड़ा, रथ और पैदल सेना), दण्ड के अधीन विनयकार्य (सबको विनम्र-वश में रखना), राजा के अधीन कोष तथा राज्य और दूत के अधीन सन्धि और विग्रह होते हैं।
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