म्रियमाणोऽप्याददीत न राजा श्रोत्रियात्करम् ।
न च क्षुधाऽस्य संसीदेच्छोत्रियो विषये वसन् ।।
मरता हुआ (अतिनिर्धन) भी राजा श्रोत्रिय (वेदपाठी ब्राह्मण) से कर न ले, इस (राजा) के देश में रहता हुआ श्रोत्रिय (जीविका न मिलने से) भूख से पीड़ित न हो (ऐसा प्रबन्ध रखे)।
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