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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 32
स्वराष्ट्रे न्यायवृत्तः स्याद्धृशदण्डश्च शत्रुषु । सुहृत्स्वजिह्मः स्निग्धेषु ब्राह्मणेषु क्षमान्वितः ।।
अपने राज्य में न्यायानुसार दण्ड प्रयोग करे, शत्रुओं के देश में कठोर दण्ड का प्रयोग करे, स्वाभाविक मित्रों में सरल व्यवहार करे और (छोटे अपराध करने पर) ब्राह्मणों में क्षमा को धारण करे।
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