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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 188
कृत्वा विधानं मूले तु यात्रिकं च यथाविधि । उपगृह्यास्पदं चैव चारान्सभ्यग्विधाय च ।।
अपने किला तथा देश की रक्षा के लिए प्रधान पुरुष से युक्त सेना का एक भाग रखकर; यात्रा के योग्य शास्त्रोक्त सवारी, शस्त्र, कवच आदि से युक्त होकर; दूसरे राजा के राज्य में जाने पर मार्ग तथा स्थिति पाने के लिए उनके भृत्य आदि को अपने पक्ष में करके;
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