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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 141
अमात्यमुख्यं धर्मज्ञ प्राज्ञं दान्तं कुलोद्गतम्‌ । स्थापयेदासने तस्मिन्खिन्नः कार्येक्षणे नृणाम्‌ ।।
(राजा कार्य की अधिकता आदि के कारण उसे देखने में) असमर्थ या थका हुआ राजा धर्मज्ञाता, विद्वान्‌, जितेन्द्रिय और कुलीन प्रधानमंत्री को प्रजाओं के कार्य को देखने के लिए नियुक्त करे।
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