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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 146
तत्र स्थितः प्रजाः सर्वाः प्रतिनन्द्य विसर्जयेत्‌ । विसृज्य च प्रजाः सर्वा मन्त्रयेत्सह मन्त्रिभिः ।।
वहाँ पर (सभाभवन में दर्शनार्थ) स्थित प्रजाओं को (यथायोग्य किसी को भाषण से, किसी को प्रियदर्शन से) संतुष्ट कर विसर्जित करे । सब प्रजाओं को विसर्जित (भेज) कर मंत्रियों के साथ मन्त्रणा (गुप्त-परामर्श) करे।
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