उस शत्रु राजा तथा मन्त्री एवं प्रजा के मुख्य लोगों की अभिलाषा को मालूम कर उसी वंश में उत्पन्न व्यक्ति को उस राज्य में पुन: अभिषिक्त करे और उसके साथ समय-क्रिया (शर्तनामा अमुक-अमुक कार्य तुम्हें स्वेच्छानुसार करना होगा तथा अमुक-अमुक कार्य मेरी आज्ञा से करना होगा इत्यादि) करे।
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