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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 215
आर्यता पुरुषज्ञानं शौर्यं करुणवेदिता । स्थौललक्ष्यं च सततमुदासीनगुणोदयः ।।
सज्जनता, मनुष्यों की पहचान करना, शूरता, कृपालुता और सर्वदा बहुत दान देना— ये सब उदासीन राजा के गुण हैं । (अतएव इस प्रकार के उदासीन राजा का आश्रय कर पूर्वोक्त) (२।२१०) लक्षण वाले शत्रु से भी युद्ध करना चाहिये।
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