स विद्यादस्य कृत्येषु निगृढेङ्गितचेष्टितैः ।
आकारमिङ्गितं चेष्टां भृत्येषु च चिकीर्षितम् ।।
वह (राजदूत) इस (शत्रुराजा) के कृत्यों (कर्तव्य अर्थात् धन, स्त्री, पद या राज्य भाग के द्वारा राजदूतों को वश में करना आदि) में शत्रुराजा के अनुचरों के इङ्गित (अभिप्रायसूचक बात और स्वर आदि) तथा चेष्टाओं (हाथ, मुख, अंगुलि आदि को इशारे वाली) से (शत्रुराजा के) क्षुब्ध या लुब्ध भृत्यों में (शत्रुराजा के) आकार (मुख को प्रसन्नता या उदासीनता आदि), इङ्गित, चेष्टा और चिकीर्षित (अभिलषित कार्य) को मालूम करे।
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