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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 16
तं देशकालौ शक्तिं च विद्यां चाबेक्ष्य तत्त्वतः । यथार्थतः सम्प्रणयेन्नरेष्वन्यायवर्तिषु ।।
(राजा) देश, काल, दण्डशक्ति और विद्या (जिस अपराध के लिए जो दण्ड उचित हो उसका ज्ञान) का ठीक-ठीक विचारकर अन्यायवर्ती (अपराधी) व्यक्तियों में शास्रानुसार दण्ड को प्रयुक्त करे अर्थात्‌ अपराधियों को उचित दण्ड दे।
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