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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 140
तीक्ष्णश्चैव मृदुश्च स्यात्कार्यं वीक्ष्य महीपतिः । तीक्ष्णश्चैव मृदुश्चैव राजा भवति सम्मतः ।।
राजा कार्य को देखकर कठोर या मृदु (सरल, दयालु) होवे; (क्योंकि समयानुसार) कठोर और मृदु राजा सबका प्रिय होता है।
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