जब राजा सब प्रकृतियों (७।१५६-१५७) को (दान-मान आदि से) अत्यन्त सन्तुष्ट तथा अपनी सेना को बलशालिनी समझे तो शत्रु को लक्ष्य कर अभियान (युद्ध के लिए यात्रा) कर दे।
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