मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 104
नित्यमुद्यतदण्डस्य कृत्स्नमुद्दिजते जगत्‌ । तस्मात्सर्वाणि भूतानि दण्डेनैव प्रसाधयेत्‌ ।।
सर्वदा दण्ड (चतुरङ्गिणी सेना की शक्ति) से युक्त रहनेवाले (राजा) से सब संसार डरता है। अतएव राजा सब लोगों को दण्ड द्वारा ही वश में करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें