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मनुस्मृति • अध्याय 7 • श्लोक 194
गुल्मांश्च स्थापयेदाप्तान्कृतसंज्ञान्समन्ततः । स्थाने युद्धे च कुशलानभीरूनविकारिणः ।।
(राजा) ठगने, भागने या युद्ध करने के लिए विश्वासपात्र, शंख, भेरी, नगाड़ा आदि वाद्यों के सांकेतित; रुकने में तथा युद्ध में, चतुर, निडर और कभी विकृत नहीं होनेवाले सेना के एक भाग को चारों तरफ दूर तक शत्रु के प्रवेश को रोकने तथा उसकी चेष्टा को मालूम करते रहने के लिए नियुक्त करे।
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