अद्यात्काकः पुरोडाशं श्वाऽ वलिह्याद्धविस्तथा ।
स्वाम्यं च न स्यात्कस्मिंश्चित्प्रवर्तेताधरोत्तरम् ।।
(यदि राजा अपराधियों में दण्ड-प्रयोग नहीं करता, तो) कोवा पुरोडाश (यज्ञान्न) को खाने लगता, कुत्ता हविष्यान्न को चाटने लगता (अनधिकारी वेदबाह्य मूर्ख यज्ञ को दूषित करने लगते), किसी पर किसी का प्रभुत्व नहीं रह जाता (बलवान् दुर्बल की सम्पत्ति छीन या लूटकर स्वयं मालिक बन बैठता) और नीच लोग ही बड़े बनने लगते हैं।
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