यान के दो भेद होते हैं शत्रु के आपत्ति में फैंस जाने पर अकस्मात् (एका-एक) समर्थ राजा का आक्रमण करना प्रथम “यान” है तथा स्वयं समर्थ न होने पर मित्र के साथ आक्रमण करना द्वितीय “यान' है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।